गया। जिले के श्रीपुर गर्ल्स स्कूल में छात्राओं को पुस्तकालय की सुविधाओं का समुचित लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है। विद्यालय की लाइब्रेरियन  पर आरोप है कि वह छात्राओं को पुस्तकालय से पुस्तकें उपलब्ध कराने में रुचि नहीं लेती हैं, जिसके कारण छात्राएं शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठाने से वंचित हो रही हैं।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, विद्यालय में पुस्तकालय की व्यवस्था होने के बावजूद छात्राओं को पुस्तकें निर्गत करने में कथित रूप से आनाकानी की जाती है। आरोप है कि पुस्तकों के वितरण के बाद उनका विवरण रजिस्टर में दर्ज करना पड़ता है और इसी जिम्मेदारी से बचने के लिए लाइब्रेरियन छात्राओं को पुस्तकें उपलब्ध कराने से परहेज करती हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी के नाम का भय दिखाने का भी आरोप

मामला केवल छात्राओं को पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराने तक सीमित नहीं है। आरोप यह भी है कि लाइब्रेरियन  द्वारा विद्यालय के प्रभारी एवं अन्य शिक्षकों के समक्ष जिला शिक्षा पदाधिकारी के नाम का हवाला देकर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी अधिकारी के नाम का हवाला देकर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को प्रभावित करना उचित है? यदि विद्यालय में पुस्तकालय और पुस्तकें उपलब्ध हैं, तो छात्राओं को उनका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है?

पुस्तकालय की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही क्यों?

विद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना का उद्देश्य छात्राओं में अध्ययन की रुचि विकसित करना, उनके ज्ञान का विस्तार करना और पाठ्यक्रम के अतिरिक्त उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध कराना है।

लेकिन यदि पुस्तकालय में नियुक्त कर्मचारी ही पुस्तकों के वितरण और अभिलेखों के संधारण की जिम्मेदारी से बचने लगें, तो ऐसी व्यवस्था का लाभ छात्राओं तक कैसे पहुंचेगा?

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या रजिस्टर में पुस्तकों की एंट्री करने की जिम्मेदारी से बचने के लिए छात्राओं के अध्ययन के अवसरों को सीमित किया जा रहा है?

जिला शिक्षा पदाधिकारी से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

इस मामले में गया के जिला शिक्षा पदाधिकारी से अपेक्षा है कि विद्यालय की पुस्तकालय व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विशेष रूप से पुस्तक निर्गमन रजिस्टर, छात्राओं को उपलब्ध कराई गई पुस्तकों का विवरण तथा पुस्तकालय के नियमित संचालन की स्थिति की जांच होनी चाहिए।

साथ ही विद्यालय के प्रभारी, संबंधित शिक्षकों, छात्राओं एवं लाइब्रेरियन का पक्ष लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था में पुस्तकालय केवल किताबें रखने का स्थान नहीं, बल्कि छात्राओं के बौद्धिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि किसी कर्मचारी की कथित लापरवाही के कारण छात्राएं इस सुविधा से वंचित हो रही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

अब देखना यह होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और छात्राओं को पुस्तकालय की सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

नोट: यह समाचार प्राप्त आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। लाइब्रेरियन , विद्यालय प्रबंधन और जिला शिक्षा पदाधिकारी का पक्ष अभी उपलब्ध नहीं है।