शिवराज से बोले मंदसौर के पीड़ित नौकरी नहीं चाहिए, दोषियों पर कार्रवाई कीजिये

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को मंदसौर पहुंचकर किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारों से मिले, जब मुख्यमंत्री एक मृतक के परिजन से मिले तो उन्होंने कहा कि हमें सरकारी नौकरी या मदद नहीं चाहिए। हम बस दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले को वे खुद देख रहे हैं और दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा। उधर, कांग्रेस भी सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने जा रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दूसरे नेता भोपाल में 72 घंटे का उपवास शुरू करेंगे। सिंधिया को एक दिन पहले ही मंदसौर में एंट्री नहीं मिली थी।

मुख्यमंत्री शिवराज पुलिस कार्रवाई में मारे गए घनश्याम (32) के पिता दर्गालाल से मिले। लाठीचार्ज में घायल होने के बाद घनश्याम को इंदौर ले जाया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पिता ने कहा कि दोषियों पर सख्त से सख्त कारवाई हो। हमें सरकारी नौकरी या सहायता राशि नहीं चाहिए। बस दोषियों पर कार्रवाई हो। इसके बाद सीएम महिलाओं से मिलने घर के भीतर पहुंचे। यहां पत्नी रेखा ने आक्रोश में आकर कहा कि आप पुलिस को गोली चलाने का आदेश दे सकते हो क्या? इस पर मुख्यमंत्री खामोश हो गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं खुद इस मामले का देख रहा हूं, दोषियों को दंड मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने घनश्याम की 2 महीने की बेटी वंशिका को गोद लिया। शिवराज ने कहा कि घनश्याम का 4 साल का बेटा रघुदनंदन और बेटी वंशिका अब सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार इनके लिए सहायता राशि के अलावा हर संभव मदद करेगी।गौरतलब है कि मंदसौर में पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई थी। शांति की अपील करते हुए शिवराज ने अनशन भी किया था।

मारे गए किसानो का ताल्लुक कहां से था ?
मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 6 किसान की मौत हो गई थी। 32 साल के घनश्याम बड़वन से थे। इसके अलावा 40 साल के कन्हैयालाल चिल्लौद पिपलिया के रहने वाले थे।
5 साल के बबलू टकरावद और 17 साल के अभिषेक बरखेड़ापंत से थे। वहीं, चैनराम नयाखेड़ा के रहने वाले थे।