EVM चैलेंज हुआ शुरू, ईवीएम की आलोचना सही नहीं – उत्तराखंड HC

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दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर में इलेक्शन कमिशन का EVM चैलेंज शुरू हो चुका है। ईवीएम चैलेंज में दो पार्टियां एनसीपी और सीपीएम हिस्सा ले रही हैं। ईवीएम पर सवाल उठने के बाद आयोग ने राजनैतिक दलों को अपनी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ साबित करने के लिए खुली चुनौती दी थी।

इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तराखंड HC ने सभी राजनीतिक दलों, व्यक्तियों, मीडिया और यहां तक कि फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया नेटवर्क को हाल ही में आयोजित विधानसभा चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल की आलोचना करने पर रोक लगा दी है।

उत्तराखंड HC के जस्टिस शरद कुमार शर्मा और राजीव शर्मा की बेंच ने कहा, ‘सभी बड़ी और क्षेत्रीय पार्टियां, एनजीओ, व्यक्ति हाल ही में हुए चुनावों के संदर्भ में ईवीएम के बारे आलोचना नहीं कर सकते हैं।’ हाई कोर्ट उत्तराखंड कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष ने एक पीआईएल दायर कर इलेक्शन कमिशन के ईवीएम चैलेंज को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। जजों ने महसूस किया कि चुनाव आयोग की तुलना अन्य किसी अथॉरिटी से नहीं की जा सकती है। यह कोर्ट की जिम्मेदारी है कि संवैधानिक निकायों की स्वतंत्रता बनाए रखी जाए और गैर जरूरी आलोचना से उसे बचाया जाए। इस तरह की प्रक्रियाओं से लोकतंत्र का आधार कमजोर होगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बेवजह किसी भी संवैधानिक संस्था की आलोचना की इजाजत नहीं देता।

इसके बाद बेंच ने अपने आदेश में कहा, ‘चुनाव आयोग ने सफलतापूर्वक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का आयोजन कराया है। हम राजनीतिक पार्टियों को एक संवैधानिक संस्था की छवि बिगाड़ने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना संविधान की अहम खासियत है।’