हरियाणा के बेटियों के सामने झुकी खट्टर सरकार, दिए स्कूल अपग्रेड करने के आदेश

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हरियाणा के रेवाड़ी में स्कूल छात्राओं की भूख हड़ताल को एक हफ्ते से ज्यादा हो गया. भीषण गर्मी के बीच भूख हड़ताल कर रही छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी है. बुधवार को तीन छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया. अब तक करीब 10 छात्राओं की तबीयत बिगड़ चुकी है.
हरियाणा के रेवाड़ी में गोठड़ा टप्पा गांव की बेटियां पिछले एक हफ्ते से भूखे-प्यासे धरने पर बैठी थी. लड़कियों का कहना था इन्हें पढ़ने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है और इस दौरान मनचले इनसे छेड़छाड़ करते हैं. कभी इनकी चुन्नी खींच ली जाती है तो कभी अश्लील गाने गाए जाते हैं. लड़कियां बेहद परेशान हैं. उनकी सरकार से मांग है कि किसी तरह गांव में बारहवीं तक स्कूल बना दें ताकि पढ़ने के लिए लड़कियों को बाहर न जाना पड़े.

हरियाणा सरकार ने छात्राओं की मांग स्वीकार की
रामबिलास शर्मा ने कहा कि उनकी जो मांग है वो हमने स्वीकार कर ली हैं. आज से या कल से बहनें वहां से उठ जाएंगीं. शर्मा ने कहा, हमने ये जानकारी भी जुटाई कि आखिर क्या कारण है कि बच्चियां जिस स्कूल को दसवीं से बारहवीं का करने की मांग उठा रही हैं, उस पर सिस्टम इतना लुंज पुंज रवैया अख्तियार किए हुए हैं.

अनशन पर बैठी लड़कियों की तबीयत बिगड़ी
अनशन पर बैठी भूखी प्यासी एक लड़की की तबीयत कल बिगड़ गई थी. जिसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन एंबुलेंस में नहीं बल्कि मोटरसाइकिल पर अस्पताल गई, वो इसलिए क्योंकि ये लोग कोई भी सरकारी मदद नहीं लेना चाहतीं थी.

अनशन पर क्यों हैं छात्राएं?
रेवाड़ी के खोल ब्लॉक के गांव गोठड़ा टप्पा डहिना की 80 से अधिक लड़कियां बीते एक हफ्ते से अनशन पर हैं. इनकी मांग है कि गांव के 10वीं तक के स्कूल का दर्जा बढ़ा कर सीनियर सेकेंडरी किया जाए जिससे कि वहां 12वीं तक पढ़ाई हो सके.

छात्राओं को 10वीं से आगे की पढ़ाई के लिए कनवली स्थित स्कूल जाना पड़ता है. ये स्कूल इनके गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर है. छात्राओं के मुताबिक उन्हें रोज स्कूल आने-जाने में छेड़खानी का शिकार होना पड़ता है. गांव के सरपंच सुरेश चौहान का कहना है कि छेड़छाड़ करने वाले शोहदे किस्म के लड़के इतने शातिर हैं कि हेलमेट पहने रखते हैं, जिससे कि उनकी पहचान ना हो सके.

लड़कियों ने अपनी परेशानी घरवालों के साथ ही सरपंच को भी बताई. घरवालों ने तो लड़कियों को यहां तक कह दिया कि स्कूल छोड़ दो. वहीं सरपंच ने मामले को स्थानीय अधिकारियों के सामने उठाया लेकिन बात नहीं बनी. आखिरकार इन लड़कियों ने खुद ही मोर्चा संभालते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी.