मनुष्य को अपने अंतर्मन पर नियंत्रण करना सीखाती है श्रीमद्भगवद गीता : हुलासगंज मठाधीश

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जहानाबाद: आज बुधवार को बिहार के जहानाबाद के मोदनगंज प्रखंड के ग्राम ओकरी में प्रांकुषाचार्य एवं हुलासगंज मठाधीश स्वामी रुपदेव जी महाराज के कर कमलो द्वारा श्री मद्भागवत कथा का समापन कार्यक्रम किया गया इस अवसर पर इस क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल कुमार के साथ इस क्षेत्र के सभी गण्यमान लोग मौजूद थे !

इस अवसर पर हुलासगंज मठाधीश एवं प्रांकुषाचार्य श्री रुपदेव जी महाराज ने श्री मद्भागवत गीता के बारे में लोगों को बहुत महत्वपूर्ण बातें बतायी उन्होंने कहा की वराह पुराण में भगवान कहते हैं कि मैं गीता के आश्रय में रहता हूं, गीता मेरा श्रेष्ठ घर है। उन्होंने कहा कि जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी व्यक्ति को कर्तव्य पथ से विचलित नहीं कर पाती।तथा मनुष्य अगर गीता का अभ्यासी संसार का सच जान ले तो वह कभी भी पथभ्रष्ट नहीं होता। उन्होंने अपने मुखारविंद से लोगों को अपने ज्ञान रूपी शब्द से बताया की यदि आप समस्याओं के भंवर में डूब रहे हैं, तो गीता उबार लेती है। गीता में ज्ञानरूपी वह संजीवनी है, जो निराश मन में आशा के प्राण फूंक देती है इस भागदौड़ भरे माहौल में भी जीने की कला सिखाती है। उन्होंने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में वेद-वेदांग पढ़ने-समझने की किसी को फुरसत नहीं है लेकिन गीता में सारे शास्त्रों का सार निहित है।

प्रांकुषाचार्य श्री रुपदेव जी महाराज ने अपने उपदेश में कहा की गीता ज्ञान का वह समुद्र है, जिसमें जितने भी गोते मारो, उसकी थाह नहीं मिलती। गीता के प्रत्येक श्लोक के अनेक अर्थ-भावार्थ निकाले जा सकते हैं। जितने भाष्य गीता पर लिखे गए हैं, उतने किसी अन्य ग्रंथ पर नहीं। गीता रूपी रत्नाकर में गोता लगाने पर जो भाव रत्न जिसे उपलब्ध हुए, उसने उनको अपनी टीका की झोली में भर दिया। गीता की अनंत भाव-रत्न राशि इससे आज तक न तो समाप्त हुई और न ही भविष्य में हो पाएगी। श्री स्वामी जी महाराज ने लोगों को बताया की आप गीता को जितनी बार पढ़ेंगे, हर बार कोई नई बात आपको जरूर मालूम पड़ेगी।