नई दिल्ली/पटना। त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी की रसोई पर महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है। पहले चीनी की कीमतों में आए तेज उछाल ने लोगों की चिंता बढ़ाई और अब प्याज के बढ़ते दाम ने घरेलू बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान प्याज की खुदरा कीमतों में तेजी देखने को मिली है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्याज का राष्ट्रीय औसत खुदरा भाव करीब ₹42 प्रति किलो तक पहुंच गया है। यह पिछले महीने के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है। वहीं अलग-अलग शहरों और खुदरा बाजारों में कीमतों में बड़ा अंतर है और कुछ जगह प्याज ₹60-65 प्रति किलो तक बिकने की खबर है।
₹25 वाला प्याज कई जगह ₹60 के पार
करीब एक महीने पहले कई बाजारों में प्याज लगभग ₹25-35 प्रति किलो के आसपास मिल रहा था, लेकिन अब कुछ खुदरा बाजारों में इसके भाव ₹60 से ₹65 तक पहुंच गए हैं। हाल के दिनों में कीमतों में आई इस तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन और बाजार में उपलब्धता से जुड़ी चिंताओं को प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। थोक बाजार में भाव बढ़ने का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
चीनी पहले ही बिगाड़ चुकी है बजट
प्याज की महंगाई ऐसे समय सामने आई है जब उपभोक्ता पहले से ही चीनी के बढ़े दाम से परेशान हैं। पिछले एक महीने में चीनी के खुदरा भाव में कई जगह तेज वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ बाजारों में चीनी ₹65-70 प्रति किलो के आसपास पहुंचने की खबरें हैं। केंद्र सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है।
हालांकि, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अध्यक्ष ने कहा है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और उपलब्ध स्टॉक मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है।
प्याज के लिए सरकार ने खोला बफर स्टॉक
प्याज की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है।
इसके साथ ही सरकार ने प्याज की तेज आपूर्ति के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाने का फैसला किया है। नासिक से प्याज लेकर विशेष ट्रेनें दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे प्रमुख बाजारों तक पहुंचेंगी, जहां कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं।
रसोई पर चौतरफा महंगाई की मार
चिंता सिर्फ प्याज और चीनी तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में खाद्य तेल, दाल और दूसरी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की खबरें सामने आई हैं। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
त्योहारी सीजन करीब आने के साथ चीनी और प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की मांग भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि सरकार की ओर से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति और बफर स्टॉक जारी करने जैसे कदमों से कीमतों में कितनी जल्दी राहत मिलती है।
