
नौजवानों, आपकी जवानी का सत्यानाश हो रहा है – रविश
जब दाल नहीं गली तो खिचड़ी बेचने लगे। खिचड़ी बेरोज़गारों का व्यंजन पहले से है, नौकरी मिल नहीं रही है तो ज़ाहिर खिचड़ी ज़्यादा बन रही होगी। रोज़ कोसते हुए बेरोज़गार खा रहे होंगे तो बड़ी चालाकी से इसे राष्ट्रीय व्यंजन बनाने के मुद्दे से जोड़ा जा रहा है ताकि बेरोज़गार युवाओं को झांसा दिया […]